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जीवन और कार्य
पाँच दशक, एक ही सूत्र।
सवाणी परिवार की कहानी 1978 में हीरा घिसने की एक अकेली मशीन से शुरू होकर उन दिसंबर समारोहों तक पहुँचती है, जहाँ सैकड़ों बेटियाँ एक ही छत के नीचे विवाह करती हैं। यहाँ यह कहानी क्रमवार प्रस्तुत है, उन्हीं तिथियों के साथ जो उस समय प्रकाशित हुई थीं।

समयरेखा
जहाँ प्रकाशित स्रोतों में किसी तिथि या संख्या को लेकर मतभेद है, वहाँ दोनों दी गई हैं। विशेष रूप से विवाह पहल के शुरुआती वर्षों का विवरण अलग-अलग समाचार माध्यमों में अलग-अलग मिलता है।
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लगभग 1970रणपरडाप्रारंभिक जीवन
सौराष्ट्र के एक परिवार में जन्म
महेश सवाणी का जन्म सौराष्ट्र के रणपरडा गाँव के एक पाटीदार परिवार में हुआ। एक गुजराती परिचय-लेख में उनकी जन्मतिथि 3 नवंबर 1970 बताई गई है। उन्होंने साधना विद्यालय में पढ़ाई की और बाद में बेंगलुरु के दयानंद सागर से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया।
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1978एक मशीनपरिवार
एक मशीन से पिता की शुरुआत
वल्लभभाई सवाणी एक हीरा निर्माण कंपनी में मज़दूर के रूप में काम करते थे, जहाँ बताया जाता है कि उन्हें ₹125 मासिक वेतन मिलता था। 1978 में उन्होंने एक मशीन लगाकर अपनी हीरा इकाई शुरू की। यही पी.पी. सवाणी ग्रुप की नींव है, जिसका नाम उनके बड़े भाई, स्वर्गीय प्रेमजीभाई पोपटभाई सवाणी के नाम पर रखा गया।
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1980 का दशकवराछाशिक्षा
पहला पी.पी. सवाणी स्कूल
ग्रुप के अनुसार, वल्लभभाई सवाणी ने 1982 में सूरत के वराछा क्षेत्र के खोडियार नगर में पी.पी. सवाणी ग्रुप ऑफ़ स्कूल्स की आधारशिला रखी। ग्रुप के ही एक स्कूल के अनुसार ग्रुप की स्थापना 1987 में हुई, जब पी.पी. सवाणी चैतन्य विद्या संकुल 287 विद्यार्थियों के साथ शुरू हुआ।
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1990हीरेउद्यम
पारिवारिक व्यवसाय में प्रवेश
महेश सवाणी अपने पिता के हीरा व्यापार से जुड़ते हैं। बताया जाता है कि उत्पादन लगभग 35,000 से बढ़कर लगभग 300,000 नग प्रति माह हो जाता है और व्यवसाय मुंबई, बेल्जियम और हांगकांग में शाखाएँ खोलता है। एक गुजराती परिचय-लेख के अनुसार, मई 1992 में उनका विवाह भावनाबेन से होता है।
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2003से 2007 · मुंबई · बेल्जियमउद्यम
परीक्षा का दौर
2003 से उन्हें हीरों के आयात से जुड़े कानूनी मामलों का सामना करना पड़ता है और लगभग तीन वर्ष तक वे पहले मुंबई और फिर बेल्जियम में रहते हैं। वे बरी होते हैं और सूरत लौट आते हैं।
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2008शुरुआतसामाजिक
पहला कन्यादान
सवाणी परिवार के एक निकट व्यक्ति का अपनी दो बेटियों के विवाह से कुछ ही समय पहले निधन हो जाता है। विभिन्न रिपोर्टों में उन्हें कहीं रिश्तेदार तो कहीं कर्मचारी बताया गया है। महेश सवाणी स्वयं कन्यादान करते हैं और दोनों विवाहों का पूरा खर्च उठाते हैं। उसी वर्ष परिवार रियल एस्टेट के क्षेत्र में कदम रखता है।
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2010–12सामूहिक विवाहसामाजिक
एकल विवाहों से दिसंबर की परंपरा तक
कई एकल विवाहों के बाद पहला सामूहिक विवाह समारोह आयोजित होता है। रिपोर्टों में इसका वर्ष 2010 या 2012 बताया गया है। तब से ये विवाह मोटा वराछा के अब्रामा स्थित पी.पी. सवाणी चैतन्य विद्या संकुल में हर वर्ष दिसंबर में होने वाला आयोजन बन जाते हैं।
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2016सितंबर · दिसंबरबच्चे
शहीदों के बच्चों के लिए संकल्प और 236 दुल्हनें
18 सितंबर 2016 के उरी हमले के बाद वे शहीद सैनिकों के बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने का संकल्प लेते हैं। बच्चे अपने वर्तमान स्कूलों में ही पढ़ सकते हैं या सूरत के पी.पी. सवाणी स्कूलों में छात्रावास सुविधा के साथ निःशुल्क पढ़ाई कर सकते हैं। वे उच्च शिक्षा और बेटियों के विवाह में भी सहयोग की पेशकश करते हैं, और प्रधानमंत्री तथा रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखते हैं।
दिसंबर में उनके समारोह में 236 पिताविहीन दुल्हनों का विवाह होता है, जिनमें पाँच मुस्लिम और एक ईसाई महिला शामिल हैं, और उन्हीं के साथ उनके बेटे मितुल का भी विवाह होता है। AFP की रिपोर्ट दुनिया भर में पहुँचती है। वे कहते हैं, “700 से अधिक बेटियों का कन्यादान करके मैं एक गौरवान्वित पिता बन गया हूँ।”
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2017कोसंबा · सूरतशिक्षा
पी.पी. सवाणी यूनिवर्सिटी; 251 जोड़े
गुजरात निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम, 2017 के अंतर्गत पी.पी. सवाणी यूनिवर्सिटी की स्थापना होती है, जिसका परिसर कोसंबा के पास धामडोद में है। 24 दिसंबर को वार्षिक समारोह में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धर्म के 251 जोड़े विवाह-बंधन में बँधते हैं।
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2018“लाडकडी”सामाजिक
261 जोड़े, बीमा और बैंक खातों के साथ
23 दिसंबर को 261 जोड़ों का विवाह होता है, जिनमें छह मुस्लिम और तीन ईसाई जोड़े तथा 54 ऐसी दुल्हनें शामिल हैं जिन्होंने माता-पिता दोनों को खो दिया था। हर जोड़े को एक सरकारी योजना के तहत ₹2 लाख का बीमा कवर और एक नया बैंक खाता मिलता है।

स्मृति-चिह्नों से घिरे अपने कार्यालय में। -
2019“पानेतर”सामाजिक
विवाहों का सिलसिला जारी
पारंपरिक गुजराती दुल्हन की साड़ी के नाम पर रखा गया दिसंबर का समारोह पानेतर लखाणी परिवार के साथ मिलकर आयोजित होता है। रिपोर्टों के अनुसार दुल्हनों की संख्या 271 या 300 थी।
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2021जून · दिसंबरसार्वजनिक जीवन
राजनीति का एक दौर; 300 बेटियाँ
27 जून को वे सूरत में आम आदमी पार्टी में शामिल होते हैं, जहाँ दिल्ली के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया उनका स्वागत करते हैं। दिसंबर में वे भर्ती परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में पार्टी के गांधीनगर कार्यालय पर हुए उपवास में शामिल होते हैं।
उसी महीने के समारोह चुंदड़ी महियर नी में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म की 300 बेटियों का विवाह होता है, जिनमें पहली सिख दुल्हन भी शामिल है। कोविड-19 महामारी के दौरान सेवा करने वाले डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट और पत्रकार कन्यादान करते हैं।

सूरत में मनीष सिसोदिया के साथ, जून 2021। -
2022जनवरी · दिसंबरसामाजिक
बेटियों के पास वापसी; एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड
17 जनवरी को वे आम आदमी पार्टी छोड़ देते हैं। वे कहते हैं कि राजनीति के कारण उनके पास अपने व्यवसाय, समाजसेवा और परिवार के लिए समय नहीं बचा था, और उनकी बेटियों ने उनसे कहा था कि वे राजनीति के आदमी नहीं हैं।
दिसंबर में दो दिवसीय दीकरी जगत जननी समारोह में 300 बेटियों का विवाह होता है। इसी आयोजन में एक ही कार्यक्रम में सर्वाधिक अंगदान संकल्पों का इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स कीर्तिमान भी बनता है: 1,38,283। वे 1,000 विद्यार्थियों के लिए विद्यार्थी दत्तक योजना भी शुरू करते हैं।
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2023दिसंबरसामाजिक
5,000 का आँकड़ा पार
25 दिसंबर को 25,000 से अधिक लोगों की उपस्थिति में 75 बेटियों का विवाह होता है। ANI के अनुसार कुल संख्या 5,000 तक पहुँच गई है। वे कहते हैं, “हर साल की तरह… जिन बेटियों के सिर पर अब पिता का साया नहीं है, उनकी पूरी ज़िम्मेदारी हमने ली है।”
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2024“पियरियु”सामाजिक
39 समुदायों की 111 बेटियाँ
14 और 15 दिसंबर को 111 बेटियों का विवाह होता है, जिनमें दो मुस्लिम दुल्हनें, दो श्रवण-बाधित दुल्हनें और दो दिव्यांग दुल्हनें शामिल हैं। मोरारी बापू, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और सी.आर. पाटिल उपस्थित रहते हैं। ग्रुप के अनुसार जोड़ों को हनीमून यात्रा, माताओं को तीर्थयात्रा दी जाती है, और 50,000 तुलसी के पौधे अंगदान का संदेश पहुँचाते हैं।
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2025अप्रैल · जूनबच्चे
पहलगाम संकल्प और माताओं के लिए तीर्थयात्रा
अप्रैल में पहलगाम हमले के बाद वे इस हमले में अनाथ हुए बच्चों को पी.पी. सवाणी स्कूल और पी.पी. सवाणी यूनिवर्सिटी के माध्यम से स्नातक तक की पूरी शिक्षा देने का संकल्प लेते हैं, जिसमें NEET और JEE की कोचिंग भी शामिल है। जून में डॉ. फारूक पटेल के केपी ग्रुप के साथ मिलकर परिवार दुल्हनों की लगभग 300 माताओं के लिए चार धाम जैसी तीर्थयात्रा और मुस्लिम बेटियों व उनके पतियों के लिए उमराह की व्यवस्था करता है।
स्रोत: द वीकेंड लीडर (2016, 2018); गुजरात फर्स्ट; पी.पी. सवाणी ग्रुप और पी.पी. सवाणी कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल की वेबसाइटें; विकिपीडिया और ppsu.ac.in (पी.पी. सवाणी यूनिवर्सिटी); डेक्कन क्रॉनिकल और AFP/द वर्ल्ड (दिसंबर 2016); डेली सबाह (दिसंबर 2017); DNA (दिसंबर 2018); देशगुजरात (जून 2021, जनवरी 2022); द प्रिंट और आउटलुक (दिसंबर 2021); गुजरात मित्र (दिसंबर 2021); द वीक (जनवरी 2022); ANI/देवडिस्कोर्स (दिसंबर 2022, दिसंबर 2023); द वीक/PNN (दिसंबर 2024); आज तक (अप्रैल 2025); द ट्रिब्यून (जून 2025)।